ग्रामीण भारत के खेलों में गिल्ली डंडा काफी लोकप्रिय रहा है। आज भले ही यह बहुत कम दिखाई देता हो पर जिनकी परवरिश ग्रामीण भारत में हुई है उनकी इस खेल से लगाव जरूर होगा। और जहां भारत ज़िंदा है वहाँ यह खेल की झलक आज भी दिखाई देती है जैसे मुझे कल छत्तीसगढ़ के धमतरी ज़िले के एक अंदरूनी गाँव सिंगपुर में देखने को मिला जहां कुछ स्कूली बच्चे यह खेल बड़े ही मज़े और जोश के साथ खेलते नज़र आए।
आज इंडिया में जिस तरह से इन भारतीय खेलों को नज़र अंदाज़ किया गया है वह बहुत ही दुख की बात है और यह अदूरदर्शीता का ही परिणाम है। हम उम्मीद करते हैं सरकारों से और भारतीय खेलों के और शिक्षा से सरोकार रखने वाले संस्थाओं से की इन खेलों के प्रति ध्यान दें और इन्हें राष्ट्रीय खेलों और प्रतिस्पर्धाओं में भी शामिल करें। हमें उम्मीद है एक दिन ऐसा जरूर होगा। / * पुरुषोत्तम सिंह ठाकुर
Pix : Purusottam Singh Thakur
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