बस्तर के क्रांतिकारी आदिवासी नेता शहीद गुंडाधूर के याद में छत्तीसगढ़ के राजनदगाँव ज़िले के माओवाद से प्रभावित क्षेत्र मानपुर में तीन दिवसीय भूमकाल दिवस का आयोजन किया गया है। इसमें राज्य के अलावा राज्य के बाहर से काफी तादाद में आदिवासी शामिल हुए हैं।
कल यहाँ आदिवासियों ने एक बड़ा जुलूस निकालते हुए राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपने तहसीलदार कार्यालय पहुँचें। इस दौरान जो बैनर और पोस्टर हाथ में लिए थे और स्लोगान दे रहे थे वह इस प्रकार हैं-
दुनिया में सबसे महान भारत का संविधान, लोकसभा ना राज्यसभा सबसे उपर ग्राम सभा, ग्राम सभा को शशक्त बनाओ, आदिवासियों को हिन्दू लिखना बंद करो, पिछड़ा वर्ग का हक़, अधिकार संविधान का अनुछेद340, शोषकों के टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है, गर्व से कहो हम आदिवासी हैं,भारत के मूल निवासी हैं,दलितों पर हमला बंद करो, मुसलमानो पर हमला बंद करो, या आज़ादी झूठी है देश की जनता भूखी है,पत्रकारों पर झूठा अपराध का आरोप लगाना बंद करो, शिक्षा का निजीकरण बंद करो , जातिवादियों होश में आओ,होश में आओ, मण्डल कमीशन लागू करो, पेशा कानून लागू करो।
राष्ट्रीय आदिवासी मूलनिवासी ( ST,SC , OBC ) महासभा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के बैनर मेंआदिवासी मूलनिवासी क्रांति के प्रणेता शहीद गुंडाधूर के द्वारा किए गए भूमकाल विद्रोह के याद में महान भूमकाल दिवस का आयोजन किया गया था। इस में एक नई राजनैतिक समीकरण दिखाई दे रही है जिसमें आदिवासी, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग एक होने की बात कही गई है। इस तरह से इसमें दिये गए नारे भी काफी प्रोग्रेसिव लगे।
जुलूस के बाद यह एक आमसभा में तब्दील होगई । इस सभा में वक्ताओं ने भारतीय संविधान की सराहाना करते हुए इसमें जनता को दिये गए हक़ को लागू करने के लिए कहा। वक्ताओं ने आदिवासी,अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग की एकता की बात कही माओवादी क्षेत्रों में सुरक्षाबालों द्वारा आदिवासियों के बलत्कार के आरोपों के अलावा पत्रकारों पर झूठा अपराध के मामला दर्ज करने के आरोपों के बारे में भी जिक्र किया गया। और यह भी कहा गया की अपने अधिकार और हक़ के लिए लड़ाई और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने पर आदिवासियों पर माओवादी होने का ठप्पा लगाकर आवाज़ बंद करने का आरोप लगाया।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें