शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

भूमकाल दिवस



बस्तर के क्रांतिकारी आदिवासी नेता शहीद गुंडाधूर के याद में छत्तीसगढ़ के राजनदगाँव ज़िले के माओवाद से प्रभावित क्षेत्र मानपुर में तीन दिवसीय भूमकाल दिवस का आयोजन किया गया है। इसमें राज्य के अलावा राज्य के बाहर से काफी तादाद में आदिवासी शामिल हुए हैं।


 

कल यहाँ आदिवासियों ने एक बड़ा जुलूस निकालते हुए राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपने तहसीलदार कार्यालय पहुँचें। इस दौरान जो बैनर और पोस्टर हाथ में लिए थे और स्लोगान दे रहे थे वह इस प्रकार हैं-
दुनिया में सबसे महान भारत का संविधानलोकसभा ना राज्यसभा सबसे उपर ग्राम सभाग्राम सभा को शशक्त बनाओआदिवासियों को हिन्दू लिखना बंद करोपिछड़ा वर्ग का हक़अधिकार संविधान का अनुछेद340, शोषकों के टक्कर में संघर्ष हमारा नारा हैगर्व से कहो हम आदिवासी हैं,भारत के मूल निवासी हैं,दलितों पर हमला बंद करोमुसलमानो पर हमला बंद करोया आज़ादी झूठी है देश की जनता भूखी है,पत्रकारों पर झूठा अपराध का आरोप लगाना बंद करोशिक्षा का निजीकरण बंद करो जातिवादियों होश में आओ,होश में आओमण्डल कमीशन लागू करो, पेशा कानून लागू करो।  

राष्ट्रीय आदिवासी मूलनिवासी ( ST,SC , OBC ) महासभा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के बैनर मेंआदिवासी मूलनिवासी क्रांति के प्रणेता शहीद गुंडाधूर के द्वारा किए गए भूमकाल विद्रोह के याद में महान भूमकाल दिवस का आयोजन किया गया था। इस में एक नई राजनैतिक समीकरण दिखाई दे रही है जिसमें आदिवासी, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग एक होने की बात कही गई है। इस तरह से इसमें दिये गए नारे भी काफी प्रोग्रेसिव लगे। 

जुलूस के बाद यह एक आमसभा में तब्दील होगई । इस सभा में वक्ताओं ने भारतीय संविधान की सराहाना करते हुए इसमें जनता को दिये गए हक़ को लागू करने के लिए कहा। वक्ताओं ने आदिवासी,अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग की एकता की बात कही माओवादी क्षेत्रों में सुरक्षाबालों द्वारा आदिवासियों के बलत्कार के आरोपों के अलावा पत्रकारों पर झूठा अपराध के मामला दर्ज करने के आरोपों के बारे में भी जिक्र किया गया। और यह भी कहा गया की अपने अधिकार और हक़ के लिए लड़ाई और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने पर आदिवासियों पर माओवादी होने का ठप्पा लगाकर आवाज़ बंद करने का आरोप लगाया। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें