शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

रोटी, कपड़ा और मकान आज भी चुनौती है


यह फोटो नगरी ब्लॉक के एक गाँव का है जो धमतरी और नगरी विकासखंड के रास्ते में है। यहाँ लोग आज भी जंगल पर ज्यादा निर्भर करते हैं । जंगल से वह अपनी आजीविका से लेकर जलाऊ लकड़ी संग्रह करते हैं।
वहीं तस्वीर से साफ है की लोगों की हालत कैसे हैं ? लोगों के लिए रोटी, कपड़ा और मकान आज भी एक चुनौती है । / पुरुषोत्तम सिंह ठाकुर 

शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

Indian Tribes in the media


मीडिया में भारतीय आदिवासी मुद्दे आज इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय आदिवासी विश्वविद्यालय में एक सार्थक बातचीत हुई. मैंने अपने ओडिशा में आदिवासी मुद्दे पैर किये गए रिपोर्टिंग के अनुभव के आधार पैर अपनी बात रखा. इसमें मैं कंधमाल और नियमगिरि के मुद्दे के साथ साथ कालाहांडी के अकाल के समय के मुद्धों का भी जिक्र किया. 

भूमकाल दिवस



बस्तर के क्रांतिकारी आदिवासी नेता शहीद गुंडाधूर के याद में छत्तीसगढ़ के राजनदगाँव ज़िले के माओवाद से प्रभावित क्षेत्र मानपुर में तीन दिवसीय भूमकाल दिवस का आयोजन किया गया है। इसमें राज्य के अलावा राज्य के बाहर से काफी तादाद में आदिवासी शामिल हुए हैं।


 

कल यहाँ आदिवासियों ने एक बड़ा जुलूस निकालते हुए राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपने तहसीलदार कार्यालय पहुँचें। इस दौरान जो बैनर और पोस्टर हाथ में लिए थे और स्लोगान दे रहे थे वह इस प्रकार हैं-
दुनिया में सबसे महान भारत का संविधानलोकसभा ना राज्यसभा सबसे उपर ग्राम सभाग्राम सभा को शशक्त बनाओआदिवासियों को हिन्दू लिखना बंद करोपिछड़ा वर्ग का हक़अधिकार संविधान का अनुछेद340, शोषकों के टक्कर में संघर्ष हमारा नारा हैगर्व से कहो हम आदिवासी हैं,भारत के मूल निवासी हैं,दलितों पर हमला बंद करोमुसलमानो पर हमला बंद करोया आज़ादी झूठी है देश की जनता भूखी है,पत्रकारों पर झूठा अपराध का आरोप लगाना बंद करोशिक्षा का निजीकरण बंद करो जातिवादियों होश में आओ,होश में आओमण्डल कमीशन लागू करो, पेशा कानून लागू करो।  

राष्ट्रीय आदिवासी मूलनिवासी ( ST,SC , OBC ) महासभा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के बैनर मेंआदिवासी मूलनिवासी क्रांति के प्रणेता शहीद गुंडाधूर के द्वारा किए गए भूमकाल विद्रोह के याद में महान भूमकाल दिवस का आयोजन किया गया था। इस में एक नई राजनैतिक समीकरण दिखाई दे रही है जिसमें आदिवासी, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग एक होने की बात कही गई है। इस तरह से इसमें दिये गए नारे भी काफी प्रोग्रेसिव लगे। 

जुलूस के बाद यह एक आमसभा में तब्दील होगई । इस सभा में वक्ताओं ने भारतीय संविधान की सराहाना करते हुए इसमें जनता को दिये गए हक़ को लागू करने के लिए कहा। वक्ताओं ने आदिवासी,अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग की एकता की बात कही माओवादी क्षेत्रों में सुरक्षाबालों द्वारा आदिवासियों के बलत्कार के आरोपों के अलावा पत्रकारों पर झूठा अपराध के मामला दर्ज करने के आरोपों के बारे में भी जिक्र किया गया। और यह भी कहा गया की अपने अधिकार और हक़ के लिए लड़ाई और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने पर आदिवासियों पर माओवादी होने का ठप्पा लगाकर आवाज़ बंद करने का आरोप लगाया। 

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

5 बुजुर्गों के बारे में ....

राजनन्द्गाओन ज़िले के मोहला ब्लॉक के मटकशा गाँव के 5 बुजुर्गों के बारे में मेरी एक कहानी दैनिक छत्तीसगढ़ में प्रकाशित

डोंगरीपरा स्कूल

डोंगरीपारा के प्राथमिक शाला के बारे में मेरी एक लेख जो डाइनाइक छत्तीसगढ़ में प्रकाशित हुई है 

शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

मटकशा के 5 बुजुर्ग




राजनान्दगाँव ज़िले के पिछड़े हुए विकासखंड का एक गाँव है मटकशा। गोंड और हलवा आदिवासियों के यह गाँव भी बाकी आदिवासी गाँवों की तरह ही विकास में पीछे छूटा हुआ है। पर इस गाँव की एक एक बात मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित किया वह है गाँव के सुंद्री बाई, मैत्री बाई, देवारिन, दुखुराम और नरसुराम के 5 बुजुर्गों की टोली जो बकरी चराते हैं। इनकी उम्र 60 से लेकर 75 साल की होगी। ये सभी आदिवासी हैं। 
ये रोज बकरियों का एक झुंड लेकर सुबह 10/11 बजे निकलते हैं और दोपहर ढाई या 3 बजे के करीब वापास आते हैं। 
जब उनसे बात हुई की वह इस उम्र में क्यों बकरी चराते हैं तो नरसुराम ने कहा, " अब ताकत कम हो चुका है, खेती किसानी कर नहीं सकते इसलिए घर में बैठने के बजाए यह काम कर रहे हैं। 
सुन्द्री बाई ने कहा की छोटे बच्चे स्कूल जाते हैं, जवान लोग खेती करते हैं इसलिए हम यह काम कर रहे हैं। 
कब से कर रहे हैं ? इस पर उन्होने जवाब दिया की पहले घर में बकरी नहीं था, एक दो होता था जिसे जंगली जानवर खा जाते थे, इसलिए अब हम मिलकर बकरी पाल भी रहे हैं और चरा भी रहे हैं। 
जब चराने जाते हैं तो गप भी मारते होंगे ? इस पर हँसते हुए मैत्री बाई ने कहा " हाँ जब बकरी चरते होते हैं तो बैठ के गप मारते हैं लेकिन बकरी इधर उधर भागते हैं तो लड़ भी लेते हैं  और बकरियों के पीछे भागते हैं। 
बकरी बेचते भी हैं ? तो उन्होने कहा, जब जरूरत होती है बकरी बेच कर कर जरूरत पूरा भी करते हैं। 
आप लोगों को निराश्रित पेंशन मिलता है ? इसपर सब जवाब देते हैं, कई बार नाम लिखकर लेगये हैं पर अभीतक नहीं मिला ! और उन्होने पूछा हमें क्यों नहीं मिल रहा है और कब  मिलेगा ? 

पुरुषोत्तम सिंह ठाकुर 

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2016

आदिवासी क्षेत्र में स्कूल जाते बच्चे


शहर में जहां बस और अलग अलग माध्यम से स्कूल जाते हैं लेकिन ग्रामीण भारत में और खासकर के आदिवासी क्षेत्र में बच्चे स्कूल आज भी कई कई किलोमीटर जाते हुए देखे जाते हैं वह भी पैदल या साइकल से। 








पुरुषोत्तम सिंह ठाकुर 

बुधवार, 3 फ़रवरी 2016

सब्जी वाले बुजुर्ग दंपत्ति




आज खैरागढ़ में इन बुजुर्गों से मुलाक़ात हुई। वह अपने घर के बाड़ी के सब्जी बेच रहे थे। ये एक अलग बात है की वह यह मजबूरी में कर रहे थे या क्यों और न उनसे यह सब पुछने की हिम्मत नहीं हुई । /पुरुषोत्तम सिंह ठाकुर 

सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

सागर के लोहार यायावर

कल यानी 31 जनवरी को खैरागढ़ आते आते राजनान्दगाँव से पहले इन यायावर समुदाय को देखा। ये मध्य प्रदेश के सागर ज़िले से हैं। उनमें से एक सुमेर सिंह से मुलाक़ात हुई जो अपनी पत्नी के साथ लोहे का औज़ार बना रहे थे। ये सभी लोहार हैं जो बर्षात के चार महीने छोडके बाकी समय देश भर में यू ही घूम घूम के लोहे का औज़ार बनाते हैं और जहां रहते हैं वहाँ और आसपास के बाज़ार में जाके बेचते हैं। ये ज़्यादातर कृषि से संबन्धित औज़ार बनाते हैं। 
एक बात दुख की यह है की न तो इनके पूरखे और न ये और तो और इनके बच्चे कभी स्कूल गए और ना जाने की संभावना दिखाई देती है। पुछने से कहते हैं की उनके गाँव में न खेती है औटर न दूसरा कमाई का जरिया तो वह घर में रहके बच्चों को पढ़ा पाएंगे। उन्होने कहा सरकार से कहिए न हमें ज़मीन दे ताकि हम खेती करें और बच्चों को पढ़ाएँ। अब पता नहीं सरकार क्यों इस पर ध्यान नहीं दे रही है ।
दूसरी ओर ये बहुत ही मेहनतकश लोग हैं और महिलाएं तो बहुत ही दोहरी ज़िम्मेदारी निभाते हुए दिखाई देते हैं जैसे पानी लाना, खाना बनाना , बच्चों को सम्हालना, लोहार काम में मदद करना और सामान ले जाके बाज़ार में बेचना। मैं पिछले कुछ सालों से इनके कई लोगों से अलग अलग जगह मिला जैसे इस साल एक ग्रुप को ओड़ीशा के नुआपाड़ा ज़िले के उद्द्यानबंध गाँव में, एक टोली को रायगड़ ज़िले के धरमजयगड़ में और इस टोली को कल छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव में । / सभी फोटो और आलेख पुरुषोत्तम सिंह ठाकुर 






All pix by Purusottam Singh Thakur