गाँव से जुड़ने मोदीमाटवाडा स्कूल ने किया और एक पहल
पालकों के लिए भी शौचालय का दरवाजा खोला

एक स्कूल ग्रामीणों के ज़िंदगी से किस तरह से जुड़ सकता है और अपनी ओर से क्या
क्या पहल कर सकता है इसका और उदाहरण प्रस्तुत किया है छत्तीसगढ़ राज्य के कांकेर
जिले के एक प्राथमिक शाला ने. उस प्राथमिक शाला का नाम है शासकीय प्राथमिक शाला
मोदी-माटवाडा जो कांकेर शहर से ३ किमी दूर स्थित है.
देश के प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने के लिए तरह तरह के
कार्यक्रम की ना केवल शुरूआत कर चुके हैं बल्कि देश भर में इसे लेकर कई तरह के
प्रयोग भी हो रहे हैं. जिसके अंतर्गत सभी गाँव में और सब के घर शौचालय निर्माण के
लिए जोरशोर से प्रयास जारी है और ऐसा ही प्रयास तक़रीबन 500 लोगों की आबादी वाली मोदी-माटवाडा
गाँव में भी जारी है. इस प्रयास के चलते ज्यादातर लोगों के घरों में शौचालय का
निर्माण भी हो चूका है पर कुछ के घरों में अभी भी बाकी है. दूसरी ओर जिनके घरों
में शौचालय निर्माण नहीं हुआ है उनके उपर काफी दबाव है . गाँव में न केवल बड़े बल्कि बच्चे भी उन लोगों पर नज़र रख रहे हैं जो
शौच के लिए बाहर जा रहे हैं. इस समस्या से निजात पाने के लिए गाँव के प्राथमिक शाला

के प्रधान शिक्षिका अनसूया जैन ने भी हर बार की तरह इस बार भी एक पहल किया है-
“ जब हम पूरे गाँव को एक परिवार मानते हैं और जब परिवार के कुछ लोगों के घर अभी
शौचालय नहीं हैं तो वह बाहर क्यों जाएँ ? इसलिए हमने अपने सहयोगिओं और बच्चों के
साथ बात करके यह पहल की है. जिसके तहत यह
तय किया गया है की जब तक इन लोगों के घर में शौचालय निर्माण नहीं हो पाया है तब तक
वह स्कूल के शौचालय का प्रयोग कर सकते हैं. और तब से पिछले 15 दिनों से वार्ड नंबर
1 और 4 से करीब 10-15 महिलायें और पुरुष यहाँ का शौचालय का प्रयोग कर रहे हैं.”
गौरतलब है की इस स्कूल के शौचालय की साफ़ सफाई और रख रखाव देखने लायक है. इस
शौचालय में ओवर हेड टैंक भी है जहाँ हर वक़्त पानी की व्यवस्था है, हाथ धोने के लिए
लिक्विड साबुन का भी इंतज़ाम है !
स्कूल के और दो शिक्षिका साईरा बानो खान और अराधना चितरैया का भी सहयोग के
बिना तो यह सब काम संभव ही नहीं हैं. उनका स्कूल इस साल जिले में स्वच्छ स्कूल के
रूप में भी चुना गया है और राज्य में भी इस स्कूल का नाम भेजा गया है.
मोदीमाटवाडा के सरपंच गणेश ध्रुव का कहना है- “ शौचालय निर्माण के अंतर्गत
ज्यादातर शौचालय का निर्माण हो चूका है. और कुछ बाकि है जो जल्द पूरा हो जाएगा ऐसे
में स्कूल के इस पहल से हमारा काम आसान हो गया है और इसके लिए हम स्कूल के आभारी
हैं. और यह स्कूल और इसके शिक्षक गाँव के विकास में विशेष योगदान देते रहे हैं.”
इस तरह से इस प्राथमिक शाला की प्रधान पाठिका अनसूया जैन गाँव वालों के हर सुख
दुःख में अपने आपको और स्कूल को जोड़े रखती हैं जिसके चलते गाँव वालों, पंचायत का
और सबसे ज्यादा पालकों का सहयोग स्कूल को बराबर मिलता रहता है जिससे स्कूल में
गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए माहौल खुद ब खुद बन जाता है और स्कूल और गाँव एक
दुसरे के विकास बराबरी के हिस्सेदार नज़र आते हैं.

# मोदी माटवाडा प्राथमिक शाला से लौटकर पुरूषोत्तम सिंह ठाकुर
साथिओं आप को अनसूया जैन और उनके स्कूल की कहानी पहले भी कई बार शेयर कर चूका
हूँ और यह कई जगह प्रकाशित भी होचुका है, एक लिंक नीचे दे रहा हूँ. एक कहानी तो
हमारे
“ सपनों की उड़ान पुस्तिका में भी प्रकाशित है .
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