ओलंपिक जाना चाहता है बुधिया
- 22 जुलाई 2016
फ़िल्म 'बुधिया सिंह: बॉर्न टू रन', पांच अगस्त को रिलीज़ होने वाली है. यह ओडिशा के नन्हें मैराथन धावक बुधिया सिंह पर आधारित है. फ़िल्म के साथ बुधिया सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं.
चर्चा के बीच ख़बर आई कि बुधिया सिंह भुवनेश्वर के स्पोर्ट्स हॉस्टल से गायब हैं. वह वहां 2007 से रह रहे हैं और डीएवी पब्लिक स्कूल में पढ़ाई करते हैं.
इस पर खुर्दा की जिला बाल कल्याण कमेटी ने शनिवार को पुलिस से बुधिया सिंह के ग़ायब होने की शिकायत की. इस पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 363 के तहत अपहरण का मामला दर्ज किया.
लेकिन अब ख़बर आई है कि बुधिया और उनकी माँ कोडाईकनाल में छुट्टियां मना रहे हैं.
PURUSOTTAM THAKUR
भुवनेश्वर के पुलिस आयुक्त वाईवी खुरानिया ने इसकी पुष्टि की.
उन्होंने कहा, "रविवार दोपहर मेरी बुधिया और उनकी माँ सुकांति सिंह से बात हुई. उन्होंने कहा कि वो अपनी मर्जी से कोडाईकनाल आए हुए हैं. वहां वो आसपास घूम रहे हैं और कोई समस्या नहीं है. वे दोनों 24-25 जुलाई को मुंबई होते हुए वापस आएंगे."
जानकारी मिली है कि बुधिया और उनकी माँ के घूमने-फिरने का इंतजाम फ़िल्म की प्रमोशन और मार्केटिंग टीम ने किया है. लेकिन इस बारे में जब फिल्म के निर्देशक सौमेंद्र पाढ़ी से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फ़ोन ही नहीं उठाया.
हॉस्टल खुलने से पहले बुधिया ने बीबीसी से कहा था. "बचपन में जैसे मैं मैराथन दौड़ता था, वैसे ही आज भी दौड़ना चाहता हूँ, मेरे गुरु जी बिरंची सर मुझे जैसे मैराथन दौड़ने का ट्रेनिंग दे रहे थे. मैं चाहता हूँ कि उनकी ही तरह मुझे कोई मैराथन का ट्रेनिंग दे."
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उन्होंने कहा था, "बिरंची सर चाहते थे कि मैं ओलंपिक जाऊं और देश का नाम रोशन करूँ. मैं बिरंची सर के सपने को पूरा करना चाहता हूँ. मेरा पूरा परिवार भी चाहता है कि मैं ओलंपिक में जाऊं और देश का नाम करूँ."
बुधिया को हॉस्टल में अच्छा प्रशिक्षण न मिलने की शिकायत है.
उन्होंने कहा, "हॉस्टल में थोड़ी-थोड़ी ट्रेनिंग देते हैं, जो अच्छी नहीं लगती. कहते हैं कि ज्यादा दौड़ोगे तो ये हो जाएगा, वो हो जाएगा. वहां ठीक से ट्रेनिंग नहीं देते हैं."
इस वजह से बुधिया हॉस्टल में नहीं रहना चाहते हैं. उनका कहना कि स्कूल के टाइमिंग की वजह से सुबह प्रैक्टिस के लिए केवल एक घंटा ही मिलता है और शाम को केवल दो घंटा.
इस शिकायत पर स्पोर्ट्स हॉस्टल भुवनेश्वर के इंचार्ज और बुधिया के कोच रूपंविता पांडा ने बीबीसी से कहा, "एथलेटिक फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के मुताबिक मैराथन दौड़ने के लिए एक तयशुदा उम्र है. बुधिया की उम्र अभी केवल 14 साल 5 महीने है, जबकि मिनी मैराथन के लिए भी 15 साल की उम्र ज़रूरी है. मिनी मैराथन 2,000 मीटर की होती है और मैराथन में 42 किमी की. हम नियमों को नज़रंदाज़ कैसे कर सकते हैं?"
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बुधिया सिंह ने 2006 में चार साल की आयु में पुरी से भुवनेश्वर तक की क़रीब 63 किमी की दूरी दौड़ कर पूरी की थी. इससे वो दुनिया भर में मशहूर हो गए थे.
दौड़ के आखिर में उनकी जो हालत हुई थी, उसके बाद से यह दौड़ भी विवादास्पद हो गई थी.
जिला बाल कल्याण कमेटी की सुझाव पर राज्य सरकार ने कम उम्र के बावजूद बुधिया को स्पोर्ट्स हॉस्टल भेज दिया था. वो तबसे वहीं रह रहे हैं.
वो भुवनेश्वर के डीएवी इंग्लिश मीडियम पब्लिक स्कूल में नौंवी कक्षा के छात्र हैं.
मैराथन के लिए बुधिया को बिरंची जैसे किसी कोच की तलाश है. इस वजह से वो हॉस्टल नहीं जाना चाहते हैं. वहीं उनकी मां का कहना था कि कोच की व्यवस्था होने तक बुधिया को हॉस्टल जाना चाहिए.
बुधिया के परिवार में उनकी माँ के अलावा तीन बहनें हैं. वो भुवनेश्वर के झोपड़पट्टी सालिया साही में रहती हैं.
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'बुधिया सिंह: बोर्न टू रन' को इस साल का राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिल चुका है. यह फ़िल्म पांच अगस्त को रिलीज़ होने वाली है.
बिरंची की पत्नी गीता पंडा ने उम्मीद जताई कि फिल्म के रिलीज़ होने के बाद बुधिया के अधूरे सपने भी पूरे होंगे.