शनिवार, 25 जून 2016

सौ साल का मानव जीवन !



एक  दोरला लोक कथा
 सौ साल का मानव जीवन !
भगवान ने सृष्टि की रचना  करने के बाद दुनिया के प्राणियों को उनकी उम्र बांटने लगे। सभी प्राणी भगवान के सामने जमा होने लगे । सबसे पहले भगवान के सामने आदमी आया और हाथ फैला के कहा, “ हे भगवान मेरी उमर दीजिये ! भगवान ने कहा  तुम्हारी उम्र 40 साल ! ” आदमी कुछ मायूस हो कर कहा, हे भगवान आप ये क्या कर रहे हैं ? 40 साल से मेरा क्या होगा प्रभु ? मुझे तो जवान होने में 20 साल लग जाता है और 20 साल में क्या करूंगा ? मुझे और कुछ ज्यादा उम्र दीजिये प्रभु ! भगवान ने कहा की सभी प्राणियों को उम्र बांटना है, फिर भी इंतज़ार करो अगर सब को उम्र बांटने के बाद कुछ बच जाएगा तो ले लेना।
उम्र लेने के लिए दूसरे नंबर पर बैल आया, बैल ने भी कहा “ हे प्रभु मुझे मेरी उम्र दीजिये ! ” भगवान ने कहा की “ तुम भी ले लो 40 साल ! ” इस पर बैल घबरा के बोला “ मुझे 40 साल नहीं चाहिए प्रभु ! मैं 40 साल लेके क्या करूंगा मैं जैसे ही थोड़ा सा बड़ा होता हूँ, यह आदमी मुझे हल जोतने में लगाता है मुझे बहुत मेहनत करवाता है, इस लिए 20 साल ही मेरे लिए काफी है । ” यह सुनते ही पास खड़ा वह आदमी चिल्लाता है- “ प्रभु,प्रभु ! उस बैल का 20 साल मुझे दे दीजिये प्रभु ” भगवान कहते हैं ठीक है !
फिर बारी आती है कुत्ते की । कुत्ता भगवान के सामने आके खड़ा होता है और कहता है “ मुझे मेरी उमर दीजिये प्रभु ! ” तो भगवान कहते हैं “ तुम भी क्या याद करोगे, तुम भी लो 40 साल । ” इस पर कुत्ता बोलता है “ ये क्या कर रहे हैं प्रभु ! मुझे इतनी उमर नहीं चाहिए । क्योंकि जब मैं छोटा होता हूँ तब यह आदमी मुझे पुचकारता है, प्यार करता है पर जैसे बड़ा होता हूँ, यह मुझे लात से लाठी से मारता है, दुतकारता है, इसलिए मुझे 20 साल ही दीजिये । ” यह सुनते ही आदमी फिर चिल्लाता है प्रभु मुझे कुत्ते का 20 साल भी दे दीजिये । ” भगवान कहते हैं ले लो । इस तरह से आदमी का उमर 80 साल हो जाता है।
कुत्ते के बाद उल्लू की बारी आती है। उसने भी आके भगवान से कहा की “ हे प्रभू मुझे मेरी उमर दीजिये। ” भगवान ने कहा “ तुम्हारी उम्र भी 40 साल ! ” उल्लू अपने आँखों को और बड़ा करके देखा और बड़ा ही दुखी होकर कहा “ हे प्रभु, मैं तो निशाचर प्राणी, रात भर घूमता फिरता हूँ तो मुश्किल से अपना पेट भरता हूँ, नहीं प्रभु मुझे 40 साल नहीं चाहिए, मुझे 20 ही दीजिये ।” भगवान कहते हैं ठीक है, तभी वह आदमी फिर चिल्लाता है और कहता है “ प्रभु मुझे उल्लू का वह 20 साल भी दे दीजिये। ” प्रभु कहते हैं ठीक है लेलो। इस तरह से आदमी का उम्र 40 की जगह 100 साल हो जाता है जिसमें उसका 40 और 20 बैल की, 20 साल कुत्ते की और 20 साल उल्लू की शामिल है।
इसलिए आदमी 40 साल तक अपने हिसाब से आराम से जीवन व्यतित करता है उसके बाद उसका 20 साल यानि 60 साल तक वह परिवार की ज़िम्मेदारी ढोते हुए बैल की तरह मेहनत करते हुए जीवन जीता है उसके बाद के 20 साल यानि 60 साल के बाद वह काम करने लायक नहीं होता है,परिवार में बेटा बहुओं की राज में उसकी पूछ कम हो जाती है इस तरह से वह 60 से 80 साल तक वह कुत्तों की जींदगी जीता है। फिर 80 साल के बाद वह बीमार होता है, रात में खासता है,सो नहीं पाता है इस तरह वह उल्लू की जींदगी जीता है .......इस तरह से आदमी 100 साल जीता है।
The story I have listened from the story teller Dada Dewkal 
Transcribed by Purusottam Singh Thakur